'तो हिंदू कट्टरपंथियों का अगला निशाना दाभोलकर के सहयोगी श्याम मानव थे'

  • संतोष तिवारी & सूरज सावंत
  • क्राइम

कट्टर हिंदूवादी संगठन और डॉ. दाभोलकर हत्या मामले में गिरफ्तार किये गए आरोपियों के बारे में एटीएस नए नए खुलासे कर रही है। कोर्ट को जानकारी देते हुए एटीएस ने बताया कि इन कट्टर हिंदू संगठन के निशाने पर श्याम मानव भी थे। श्याम मानव की हत्या अमरावती में करने की साजिश इस संगठन द्वारा रची जा रही थी। आपको बता दें कि श्याम मानव भी अंधश्रद्धा निर्मूलन के अध्यक्ष रह चुके थे और दाभोलकर के सहयोगी बताए जाते हैं।

अमरावती में करनी थी हत्या

इस कार्य के लिए पैसा और हथियार की जरूरत थी जिसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी श्रीकांत पांगारकार को सौंपी गयी थी। अधिकतर मुंबई में ही रहने वाले श्याम मानव को मुंबई में मारना असंभव था इसीलिए इन्हें अमरावती में मारने की साजिश रची गयी क्योंकि सामाजिक कार्यों के चलते श्याम अक्सर अमरावती आते जाते रहते थे। इसकी वजह यह भी थी कि अमरावती कम भीड़ भाड़ वाला इलाका है और मुंबई काफी भीड़ भाड़ वाला।  मुंबई में मारने पर पकड़े जाने का भय था जबकि अमरावती में आसानी से भाग निकलने का चांस था, इसीलिए अमरावती में ही इस हत्या को अंजाम दिए जाने की साजिश रची गयी।

पांगारकर ने  व्यवस्था

एटीएस ने यह भी बताया कि इस काम के लिए जालना में पांगारकर ने प्रशिक्षण के लिए एक स्थान की भी व्यवस्था की थी जहां आरोपियों को बंदूक चलाना और बम बनाना सिखाया जाता था। खुद पांगारकार ने भी यहीं से प्रक्षिशण प्राप्त किया था। एटीएस के मुताबिक के अनुसार पांगारकार के खिलाफ जालना के कदीम जालना पुलिस ने 1998 से लेकर 2005 तक कुल 5 केस दर्ज किये थे, जिसमें दंगा भड़काने, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने जैसे धारा भी शामिल हैं।

पांगारकर ही 'प्राजी' 

एटीएस ने सबूत के तौर पर कोर्ट में आरोपियों की कॉल डिटेल्स और टॉवर लोकेशन भी पेश किया। 31 अगस्त की कॉल डिटेल्स भी एटीएस ने कोर्ट में पेश की। उस कॉल डिटेल्स के मुताबिक पांगारकर, अमोल काले के संपर्क में था। यही नहीं गौरी लंकेश हत्या मामले में कर्नाटक एसआईटी ने भी पांगारकर से पूछताछ की अनुमति सरकार से मांगी थी। एसआईटी ने अपनी छानबीन में अन्य आरोपियों के पास से काफी सबूत इकट्ठा किया था जिसमें एक डायरी भी थी। उस डायरी में पांगारकर का नाम 'प्राजी' दर्ज किया गया था।

बैंक खाता और नकली बाइक की जांच 

जांच में यह भी पता चला कि पांगारकर ने हत्या के लिए नकली बाइक भी उपलब्ध कराइ थी। एटीएस ने कहा है कि इस बाइक की जांच चल रही है। साथ ही एटीएस ने पांगारकर द्वारा किये गए भिन्न बैंकों से वित्तीय लेनदेन को भी खंगाल रही है।

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