50,000 परिवारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मांग

नोटबंदी , विकासको की गलत निती और अन्य गलतियों के कारण इस वक्त मुंबई में कई ऐसे प्रोजेक्ट है जो आधे अधूरे पड़े हुए है। डेवलपर्स ने निवासियों को वैकल्पिक आवास का भुगतान भी बंद कर दिया है। कुछ बिल्डर तो जेल चले गए है जिसके कारण उनके प्रोजेक्टस आधे अधूरे पड़े है। इन सारी बातों का खामियाजा आम मुंबईकर को उठाना पड़ रहा है। मुंबई के लगभग 50 हजार भाड़े पर रहनेवाले परिवारो में से ज्यादातर परिवार मराठी समुदाय से आते है।

जर्जर परियोजनाओं को संभालने और म्हाडा के माध्यम से उनका पुनर्विकास करने की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके लिए म्हाडा से 1,000 करोड़ रुपये की मांग की गई है। मुंबई में रहनेवाले कई लोगों ने पुर्नविकास के नाम पर अपना रुम खाली कर दिया और इसे विकसित करने के लिए बिल्डर को दे दिया। इसी दौरान नोटबंदी हो गई जिसके बाद कई विकासको ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की तो वही कई विकासको को अपनी गलत नितियों के कारण प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ने पड़े।

एक हजार करोड़ की मांग

शिवसेना उपनेता और म्हाडा( मरम्मत और पुर्ननिर्माण बोर्ड ) के अध्यक्ष विनोद घोषालकर ने कहा कि समीक्षा प्राधिकरण की बैठक में ये बात सामने आई है की म्हाडा ने जिन डेवलपर्स को 2003 से 2019 तक अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है, उनसे से कई विकासको ने परियोजना के कार्यों को बंद कर दिया है , इसके साथ ही डेवलपर्स ने निवासियों को भाड़ा देना भी बंद कर दिया है।

दादर और माहिम में 21 परियोजनाएं

मुंबई बिल्डिंग एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड के अध्यक्ष विनोद घोषालकर ने हाल ही में दादर में छप्रा भवन का दौरा किया। इस भवन का निर्माण कई वर्षों से रुका हुआ है। इन इमारतों के निवासियों को पानी और बिजली की आपूर्ति स्थानीय विधायक सदा सरवनकर की पहल से की जाती है। छपरा बिल्डिंग के निवासियों का डेवलपर पर कोई भरोसा नहीं है। इसलिए निवासी चाहते हैं कि इस परियोजना को म्हाडा कब्जे में ले। घोसालकर ने कहा की इसी तरह, 21 परियोजनाएं दादर और महिम में अटकी हुई है।

विनोद घोसालकर ने कहा की इन सभी आवासों को फिर से तैयार करने के लिए म्हाडा की ओर से कदम उठाए जाएंगे और इसके लिए म्हाडा से 1000 करोड़ रुपये की राशि की मांग की गई है। विनोद घोसालकर का कहना है की बोर्ड के सभी निदेशकों ने इस मांग का समर्थन किया है।

मुंबई बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पत्र जारी करने के बाद काम पूरे हुए, काम ना शुरु हुए और काम प्रगति पर होनेवाले सभी प्रोजेक्टस की एक लिस्ट तैय़ार की है। मार्च 2018 में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में कुल 49 हजार 945 लोग ऐसे प्रोजेक्टस के पिड़ित है जिनका ना तो काम शुरु हुआ है या फिर उनके प्रोजेक्टस का कार्य अभी भी चालू है।

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