मुंबई: बीएमसी ने अंधेरी, मुलुंड में खतरनाक इमारतों की पहचान की

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने इस साल मानसून से पहले किए गए एक सर्वेक्षण में पूरे मुंबई में 337 जर्जर इमारतों की पहचान की है। हालांकि, यह पिछले साल के 465 से करीब 30 फीसदी कम है। इन इमारतों (MUMBAI DILAPIDATED BUILDING)  के गिरने का खतरा बना हुआ है। लिहाजा, किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए नगर निकाय ने नोटिस जारी कर उन्हें खाली करना शुरू कर दिया है।

बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे खतरनाक इमारतें पश्चिम उपनगरों में 163 हैं, इसके बाद पूर्वी उपनगरों में 104 और शहर में 70 हैं। पश्चिमी उपनगरों में से अंधेरी (पश्चिम)  मे सबसे खतरनाक इमारत की संख्या ज्यादा हैं। जबकि मुलुंड में पूर्वी उपनगरों में सबसे ज्यादा जर्जर इमारतें हैं।

आंकड़ों के अनुसार, द्वीप शहर में एफ-नॉर्थ (माटुंगा, सायन) में 26 और जी-नॉर्थ (दादर, धारावी) में 10 इमारतों को जीर्ण-शीर्ण घोषित किया गया था। पश्चिम उपनगरों में, के-वेस्ट (अंधेरी, जोगेश्वरी पश्चिम) में 40 इमारतें, के-ईस्ट (अंधेरी, जोगेश्वरी पूर्व) में 28 और एच-वेस्ट (बांद्रा, खार) में 30 इमारतों को जीर्ण-शीर्ण के रूप में पहचाना गया।

पूर्वी उपनगरों में टी-वार्ड (मुलुंड) में 49 इमारतों और एन वार्ड (घाटकोपर, विक्रोली) में 20 इमारतों को सी-1 श्रेणी (रहने योग्य और खतरनाक) के रूप में घोषित किया गया था। जिन  इमारतो को तत्काल ध्वस्त किया जाना चाहिए, उन्हें सी-1 के रूप में टैग किया जाता है। यदि इमारत 30 वर्ष से अधिक पुराना है, तो आवासीय सोसायटी को संरचनात्मक लेखा परीक्षा करने की सलाह दी गई है।

इसके बावजूद हाल ही में कई इमारतें या उसका कुछ हिस्सा अक्सर गिर जाता है। सूची नागरिक निकाय की आधिकारिक वेबसाइट www.mcgm.gov.in पर उपलब्ध है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में 499 जीर्ण-शीर्ण इमारतों के पाए जाने के कारण एक महत्वपूर्ण गिरावट आई है।

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