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बीएमसी POP को निगेटिव लिस्ट में डालेगी

प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों पर बॉम्बे हाईकोर्ट और सीपीसीबी के प्रतिबंध के बाद बीएमसी ने लिया ये फैसला

बीएमसी POP को निगेटिव लिस्ट में डालेगी
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बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी गणेश प्रतिमाओं के प्राकृतिक स्थानों पर विसर्जन पर रोक लगाने के बाद बीएमसी ने भी कार्रवाई की है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि हम जल्द ही पीओपी को 'नकारात्मक' सूची में डाल देंगे। इसके बाद इसे खरीदने के लिए मंजूरी की आवश्यकता होगी। (BMC will put Plaster Of paris POP in negative list, big preparations after Bombay High Court and CPCBs ban on POP idols)

POP खरिदने के लिए बताना होगा कारण

बीएमसी का मानना है कि पीओपी खरीदते समय यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि इसे किस उद्देश्य से खरीदा जा रहा है।मूर्तिकारों को मूर्तियां बनाने के लिए पीओपी उपलब्ध नहीं होगी। साथ ही पीओपी विक्रेताओं को भी मंजूरी के बाद ही पीओपी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इससे पॉप मूर्तियों के उत्पादन पर स्वतः ही ब्रेक लग जाएगा।

माघी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध को लेकर हुआ था काफी विवाद

30 जनवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने समुद्र, झीलों, खाड़ियों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में पीओपी से बनी गणेश मूर्तियों के विसर्जन, उपयोग और भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया। परिणामस्वरूप, बीएमसी और पुलिस ने मुंबई के समुद्र और खाड़ियों में माघी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया। इससे मुंबई में काफी विवाद पैदा हो गया।

श्री गणेश मूर्ति संघ उच्च न्यायालय के निर्देशों पर आपत्ति जता रहा है और पीओपी मूर्तियों के निर्माण, उपयोग और विसर्जन की अनुमति देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने पर विचार कर रहा है।संघ के सचिव सुरेश शर्मा ने कहा कि हमारा हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन चूंकि हमें कोई विकल्प नहीं दिया गया है, इसलिए हम उन निर्देशों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

कोर्ट के आदेश को होगा पालन

बीएमसी प्रशासन का कहना है कि वह उच्च न्यायालय के नियमों का पालन कर रहा है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि पीओपी विवाद 2013 में शुरू हुआ था।सीपीसीबी ने प्राकृतिक स्थानों पर पीओपी मूर्तियों के विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। इसके बाद यह मामला राज्य सरकार और बीएमसी के माध्यम से उच्च न्यायालय तक पहुंच गया।

मुंबई में कई जगहों पर गणेश प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। वहीं, ठाणे, मीरा-भायंदर और नवी मुंबई से भी बड़ी संख्या में मूर्तियां और पीओपी आते हैं। बीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीओपी और उनसे बनी मूर्तियों को एमएमआर से मुंबई में प्रवेश करने से रोकना है।

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