देश में कोरोना वायरस (coronavirus) के खिलाफ वैक्सीनेशन(vaccination) को शुरू हुए महीना भर से ज्यादा समय बीत चुका है। और अब तो कई लोगों को दूसरा डोज भी दिया जा चुका है। इस समय यह 60 वर्ष या उससे ऊपर और गंभीर बीमारियों से ग्रसित 45 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है।
ऐसे में अब जब वैक्सीनेशन शुरू हो गई है तो यह सवाल बहुत सामान्य हो गया है कि कोरोना (covid 19) की वैक्सीन कितनी सुरक्षित है। चूंकि यह वैक्सीन एक साल के अंदर बनी है, ऐसे में इसके प्रभावी रहने को भी लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन असल मुद्दा जो है वो ये कि आखिर कोरोना की वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट है क्या, और अगर हां तो क्या?
शुरू में इसके साइड इफेक्ट (side effects) की काफी बातें सामने आती थीं। यहां तक की डाक्टर्स भी डरे हुए थे। कई लोगों ने तो टीका ही लगाने से मना कर दिया है। तो कुछ ऐसी भी घटनाएं सामने आई कि, टीका लगाने के कुछ दिन बाद ही शख्स की मौत हो गई। हालांकि यह मौत टीका से ही हुई, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन अब सामान्य होता नजर आ रहा है।
इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (world health organization) की तरफ से भी वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर जानकारी देते हुए बताया गया कि, वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ साइड इफेक्ट दिखाई देना सामान्य और अपेक्षित होता है। दरअसल, यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत होती है कि आपका शरीर वायरस के खिलाफ प्रतिरोध तैयार कर रहा है।
टीका लगाने के बाद निम्न लक्षण सामने आ सकते हैं।
- हल्का बुखार
- थकान
- सिरदर्द
- जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
ठीक यही बात भारत की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बताया कि यह लक्षण सामान्य हैं और अधिकतक वैक्सीन लगाए जाने के बाद लोगों में दिखाई देते हैं। इसके अलााव अमेरिका के सेंटर्स ऑफ डिजीज़ कंट्रोल एंड्र प्रिवेंशन ने इंजेक्शन लगने की जगह पर सूजन और दर्द होने को भी साइड इफेक्ट बताया है।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि ये लक्षण अमूमन एक हफ्ते से उससे कुछ कम वक्त तक हो सकते हैं, लेकिन अगर ये ज्यादा वक्त तक बने हुए हैं तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इससे आपको जल्द मदद तो मिलेगी ही, अगर वैक्सीन में कुछ दिक्कत है तो वक्त रहते दूसरों को भी इसे देने से रोका जा सकेगा।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का इस बात पर भी जोर है कि वैक्सीन से बहुत गंभीर समस्या हो जाने का बहुत कम चांस है क्योंकि 'वैक्सीन को बहुत ही जटिल और कड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं से गुजारने के बाद और इनके सुरक्षित होने के भरोसे के बाद ही इन्हें जारी किया गया था।
वैक्सीन को लेकर यह सवाल भी उठता है कि इस टीका का असर कितने दिनों तक रहेगा? इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि वैक्सीन लगने के बाद कितने लंबे समय तक इस कोरोना वायरस से सुरक्षा देगी और क्या वैक्सीन मौजूदा सभी तरह के स्ट्रेन या भविष्य में कोरोना के अन्य म्यूटेंट स्ट्रेन पर कारगर होगी या नहीं, यह क्लीनिकल ट्रायल के लंबे वक्त के डेटा पर निर्भर करेगा।
वैसे भी भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण से उबर चुके हैं उन्हें फिलहाल वैक्सीन लेने की किसी प्राथमिकता सूची में नहीं रखा गया है लेकिन इस महामारी से उबर चुके लोगों को ये टीका भविष्य में लेना जरूर चाहिए।
शरीर में प्राकृतिक तरीके से एंटीबॉडी तो बनती है लेकिन यह एंटीबॉडी कितने दिनों तक कायम रहेगी यह कुछ निर्धारित नही है। रिसर्च के अनुसार यह एंटीबॉडी 2-3 माह से 8 माह तक हो सकती है वहीं हर व्यक्ति में एंटीबॉडी का स्तर भी अलग-अलग होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालात सामान्य होने में महीनों या कुछ साल तो अवश्य ही लग सकते हैं। इसलिए वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना नियमों का पालन करना आवश्यक है।