मुंबई में स्थित बीएमसी के डॉट्स सेंटर पर MDR-TB (Multi Drug Resistant TB) से ग्रसित मरीजों को एक साल तक राशन मुफ्त में मिलेगा। साथ ही जो सामान्य टीबी के मरीज होंगे उन्हें उनके उपचार के दौरान तक राशन दिया जायेगा। आपको बता दें कि MDR-TB सामने टीबी से बड़ी बीमारी मानी जाती है जिसका इलाज लगभग एक साल तक चलता है जबकि अमूमन टीबी 3 से 6 महीने में ठीक हो जाती है।
दादर में हुई शुरुआत
गुरुवार को दादर में एक डॉट्स सेंटर में मरीजों को राशन देने का काम शुरू हुआ। 8 साल के एक बच्चे ओम को राशन देकर इस योजना की शुरुआत की गयी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (नेशनल हेल्थ मिशन) के अंतर्गत शुरू हुई इस योजना के लिओए निधि का प्रावधान इसी मिशन के अंतर्गत किया जायेगा।
मुफ्त में राशन क्यों?
सवाल यह उठता है कि आखिर बीएमसी मरीजों को मुफ्त में राशन क्यों बांट रही है? अगर कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है तो एक या दो महीने बाद उसका स्वास्थ्य अपने आप लगातार गिरता जाता है। इस दौरान मरीज को पौष्टिक आहार की काफी जरूरत होती है। पोषक आहार नहीं मिलने पर मरीज की स्थिति बदतर होती जाती है, इसीलिए डॉट्स सेंटरों पर अब मरीजों को मुफ्त में राशन देने का निर्णय किया गया है।
कितना मिलेगा राशन?
डॉट्स सेंटर पर रजिस्टर्ड मरीजों को 11 किलो राशन दिए जायेगा। इस राशन में 7 प्रकार के अनाज शामिल होंगे। इसमें बाजरा, मूंगफली, गेहूं का आटा, आलू, चावल और चने का आटा शामिल है।
बढ़ेगी रोगप्रतिरोधक क्षमता
इन मिलने वाले राशन से पौष्टिक चीज बना कर मरीजों को सेवन करना होगा। डॉक्टरों के अनुसार टीबी के मरीजों को 1450 कैलोरी ऊर्जा और 55 प्रोटीन ऊर्जा मिलना आवश्यक है। यही नहीं टीबी के मरीजों को पहले दो महीने में खान-पान में काफी ध्यान रखना पड़ता है।
टीबी से ग्रस्त मरीजों को दवाई का पूरा कोर्स करना पड़ता है। साथ ही उसे समय पर दवाई और खानपान में काफी ध्यान रखना पड़ता है। इसके बाद फायदा होता है।
- डॉ. पद्मजा केसकर, कार्यकारी आरोग्य अधिकारी, महापालिका
टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी में शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है। इसीलिए शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यही कारण है कि डॉक्टर पोषक आहार लेने की सलाह देते हैं। मरीजों को अपने नजदीकी डॉट्स सेंटरों पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर वहां से पोषक आहार लेना चाहिए। साथ ही मरीजों को खांसते और छींकते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए क्योंकि इससे वातावरण में टीबी के वायरस फैलते हैं।
-डॉ. दक्षा शाह, प्रमुख, टीबी नियंत्रण विभाग, महापालिका