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मुंबई में न हो जलभराव, BMC कर रही 'उपाय'

बीएमसी का दावा है कि 2030 तक मुंबई में जलभराव की स्थिति से लोगों को निजात मिले जाएगी. बाढ़ के प्रभाव को कम करने और निचले इलाकों में जमा हुए पानी को निकालने के लिए नदियों, नालियों, खाड़ियों और समुद्र के रास्ते पर गेट पंप लगाए जाएंगे।

मुंबई में न हो जलभराव, BMC कर रही 'उपाय'
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मुंबई में मानसून के समय हर साल सड़कों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिलती है। कई स्थानों पर पानी जमा होता है, सड़कों से लेकर ट्रेन की पटरियों तक पर पानी जमा हो जाता है, जिससे मुंबईकरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस होने वाले जल भराव को देखते हुए बीएमसी द्वारा उपाय भी किये जा रहे हैं। इन उपायों के बाद बीएमसी का दावा है कि 2030 तक मुंबई में  जलभराव की स्थिति से लोगों को निजात मिले जाएगी।

लगाए जाएंगे गेट पंप 
बाढ़ के प्रभाव को कम करने और निचले इलाकों में जमा हुए पानी को निकालने के लिए नदियों, नालियों, खाड़ियों और समुद्र के रास्ते पर गेट पंप लगाए जाएंगे। इस समय नालियों में गेट पंप लगाने की योजना पर काम चल रहा है। नालियों के रास्ते समुद्र में कचरा न जाए इसके लिए विले पार्ले के इर्ला, वर्ली सहित अन्य इलाकों में जहां नालियां समुद्र में मिलती हैं वहां 'बैक रैक स्क्रीन' लगाए जाएंगे।

मशीनों की भी ली जाएगी सहायता
जिन इलाकों में पानी जमा होगा वहां फ्लड गेट लगाया जायेगा। साथ ही रेलवे मार्ग पर बनी नालियों में से कचरा निकलाने में सक्षम मशीन 'हाइड्रोज़ूम कैमरा' का उपयोग किया जाएगा, इस मशीन के लिए 2.68 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गयी है।  

 

ज्वार-भाटा से भी निपटा जाएगा 
2020 के मानसून के लिए छोटी नालियों में से, बड़ी नालों में से और मीठी नदी से कचरा निकालने के लिए क्रमश: 50, 70 करोड़ और 18 करोड़ रुपए की राशी तय की गयी है। मुंबई में ज्वार-भाटा के दौरान जब भारी वर्षा होती है तो निचले इलाकों में बाढ़ सी आ जाती है। यह वर्षा पर ज्वार के प्रभाव पर ध्यान नहीं देता है। अब ऐसे इलाकों में ज्वार-भाटा का असर बेहद कम हो इसका भी ख्याल रखा जाएगा।

पम्पिंग स्टेशन लगाए जाएंगे 
मोगरा और माहुल में 2 पंपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए निविदा मांगी गई है। इन दो पंपिंग स्टेशनों के लिए जमीन के अधिग्रहण के बाद उनका काम शुरू किया जाएगा। पंपिंग स्टेशन के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

'नहीं होगा जलभराव'
मुंबई में हर साल मानसून के महीने में सड़क पर पानी भर जाता है. इसे देखते हुए बीएमसी ने कुल 273 स्थानों को चिन्हित किया है जहां पानी जमा होता है, इसमें से 204 स्थानों को जलभराव से मुक्त कर दिया गया है अब बीएमसी ने भी दावा किया है कि अगले मानसून से पहले 45 और जगहें बाढ़-मुक्त हो जाएंगी।

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