नगर निगम प्रशासन ने शवों के दाह संस्कार के लिए श्मशान में पर्यावरण अनुकूल लकड़ी जलाने की प्रणाली का उपयोग करने का निर्णय लिया है। यह सिस्टम मुंबई शहर और दोनों उपनगरों में कुल 9 स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। इस पद्धति का उपयोग पर्यावरणीय क्षरण से बचने के साथ-साथ वायु प्रदूषण को रोकने में उपयोगी होगा। (Mumbai Eco-friendly wood burning system at cremation sites)
श्मशानों में बिजली और गैस बर्नर के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल लकड़ी जलाने की प्रणालियों के उपयोग से प्रदूषण को कम करने में और मदद मिलेगी। मुंबई शहर में भोईवाड़ा श्मशान, गोवारी श्मशान (वडाला), वेंकुठधाम श्मशान (रे रोड) के साथ-साथ टैगोर नगर श्मशान (विक्रोली), देवनार कॉलोनी श्मशान (गोवंडी), अमरधाम पोस्टल कॉलोनी (चेंबूर) और बाबाहाई श्मशान (बोरिवली), ओशिवारा में पश्चिमी उपनगरों के श्मशान घाट, शिवधाम श्मशान (गोरेगांव) में पर्यावरण-अनुकूल लकड़ी दहन प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
दाह संस्कार के लिए लकड़ी के बजाय वैकल्पिक ईंधन के रूप में ब्रिकेट, पेलेट्स बायोमास का उपयोग करने के लिए 14 श्मशान घाटों की पहचान की गई है। वर्तमान में, मुंबई के विभिन्न श्मशान घाटों में दाह संस्कार के लिए लकड़ी की चिताएं, बिजली की चिताएं और गैस दाहगृह का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में 10 स्थानों पर विद्युत शवदाह गृह तथा 18 स्थानों पर गैस शवदाह गृह स्थापित हैं।
अब 9 बिजलीघरों पर पर्यावरण अनुकूल लकड़ी जलाने की प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2020 में शिव स्थित कब्रिस्तान में लकड़ी दहन प्रणाली का एक पायलट प्रोजेक्ट लागू किया गया था। इसके बाद बृहन्मुंबई नगर निगम के मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विभाग के माध्यम से नौ स्थानों पर इस पद्धति को लागू करने के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है।
यह भी पढ़े- महाराष्ट्र में लाडली बहन योजना, मध्य प्रदेश की तर्ज पर गरीब महिलाओं को 1200 से 1500 प्रति माह