प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कुख्यात दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर के ठाणे स्थित 'नियोपोलिस' टावर स्थित फ्लैट को अपने कब्जे में ले लिया है। अप्रैल 2022 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में इस फ्लैट को जब्त किया था। ईडी ठाणे के कासरवाडवली पुलिस स्टेशन में 2017 में कासकर के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामलों के आधार पर जांच कर रही है। (ED seizes Dawood Ibrahim's brother's flat in Thane)
इसके बाद मामला ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन स्क्वॉड को सौंप दिया गया। कासकर, उसके साथी मुमताज शेख और इसरार अली जमील ने दाऊद इब्राहिम के नाम का फायदा उठाकर बिल्डर सुरेश मेहता से संपत्ति और नकदी वसूली। साथ ही जाली चेक के जरिए 10 लाख रुपये का लेनदेन दिखाया गया। करीब 75 लाख रुपये की कीमत का फ्लैट जबरन शेख के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया।
ईडी ने इस मामले में दो अपराधों के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें दाऊद इब्राहिम, अनीस इब्राहिम, छोटा शकील, टाइगर मेमन और अन्य के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआरए) द्वारा दर्ज मामला और इकबाल कासकर और उसके साथियों के खिलाफ जबरन वसूली करने का एक और मामला ठाणे पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। जांच में ईडी ने अवैध रूप से अर्जित धन के स्रोत को छिपाने के लिए लेन-देन का खुलासा किया।
अधिकारियों ने फरवरी 2022 में कासकर से पूछताछ की। इसमें उसने भारत में दाऊद की आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। आरोपियों के घरों पर छापेमारी के बाद अप्रैल 2022 की ठाणे पुलिस रिपोर्ट के साक्ष्य के साथ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था। इसमें महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MoCCA) और भारतीय दंड संहिता के तहत जबरन वसूली और साजिश रचने की संबंधित धाराएं शामिल थीं।
2003 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्रत्यर्पित किए गए इकबाल कासकर ने भारत में दाऊद इब्राहिम के नाम पर धमकाने का काम शुरू किया। माना जाता है कि कराची में रहने वाले दाऊद के अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों और खुफिया एजेंसियों से संबंध हैं, जिससे यह मामला कानूनी और सुरक्षा के नजरिए से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अलावा एनआईए ने दाऊद की विभिन्न गतिविधियों के सिलसिले में देशभर में कार्रवाई भी की।
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