मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने मोनोरेल के रखरखाव का काम संभाला है। एमएमआरडीए जहां एक ओर मोनोरोल के लिए क्यूआर आधारित टिकट सिस्टम लाने की योजना बना रही है तो वही दूसरी ओर में, प्राधिकरण ने बढ़ते बिजली बिलों पर लगाम लगाने के लिए मोनोरेल स्टेशनों पर सोलर पैनल की छतें लगाने का फैसला किया है। एमएमआरडीए के इस फैसले के बाद प्राधिकरण को अपने बिजली बिलों पर सालाना 4 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी।
जल्द ही दादर (पूर्व) को छोड़कर सभी मोनोरेल स्टेशन की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। MMRDA ने एक निजी कंपनी को 24 साल की अवधि के लिए सौर पैनलों की खरीद और बिक्री के लिए काम पर रखा है। वर्तमान में, TATA पावर कंपनी, स्टेशनों की रोशनी के लिए खपत की जाने वाली बिजली के लिए MMRDA से 11 रुपये प्रति यूनिट वसूलती है। प्राधिकरण 75 लाख रुपये के मासिक बिजली बिल का भुगतान कर रहा है।
हालांकी अग एमएमआरडीए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करता है तो पैनलों द्वारा उत्पादित बिजली के लिए एमएमआरटीए एजेंसी को प्रति यूनिट केवल 3.75 रुपये देगा। जिससे प्राधिकरण को प्रति वर्ष 4 करोड़ रुपये की बचत होगी चूंकि बिजली आपूर्ति एजेंसी को अनुबंध 24 वर्षों के लिए दिया गया है लिहाजा वे सौर पैनलों की खरीद पर खर्च की गई लागत को आसानी से वसूल सकती है। सौर पैनल से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से स्टेशनों पर रोशनी के लिए किया जाएगा।
इसके साथ ही इस बिजली का उपयोग एस्केलेटर और लिफ्ट को चलाने के लिए भी किया जाएगा । जैकब सर्कल-वडाला डिपो- चेंबूर से 19.54 किलोमीटर का पूरा मार्ग 3 मार्च को जनता के लिए खोला गया था।
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