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रक्तदान का 'हाफ सेंचुरी' बना चुके मिलिए पुलिस में काम करने वाले इस शख्स से...


रक्तदान का 'हाफ सेंचुरी' बना चुके मिलिए पुलिस में काम करने वाले इस शख्स से...
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कहते हैं रक्तदान महादान, रक्त के महत्व को वही जान सकता है जिसे इसकी जरुरत होती है और यह जरुरत, कब किसकी जरुरत बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता, यही कारण है कि प्रशासन की तरफ से लोगों को रक्त दान करने के लिए हमेशा जोर दिया जाता है। हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह रक्तदान कर अपने नागरिक होने का फर्ज अदा करे। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मामले में मिसाल बन कर सामने आते हैं, उनमे से एक हैं शिवड़ी के आरटीओ विभाग में बतौर पुलिस नाइक काम करने वाले पुंडलिक आव्हाड। आव्हाड पिछले 20 साल से रक्तदान कर रहे हैं और अब तक ये 50 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं।

आव्हाड रक्तदान के प्रति इतने जागरूक हैं कि वो हर रक्तदान कैंप में सबसे पहले पहुंच कर रक्तदान करते हैं। यही नहीं अगर किसी को रक्त की जरूरत होती है तो आव्हाड सबसे पहले रक्त देने के लिए पहुंचते हैं। साल भर में 2 से 3 बार रक्तदान करने वाले आव्हाड को उनके इसी कार्य के चलते सहायक कमिश्नर अतुल पाटिल की तरफ से सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।

आव्हाड ने जो त्रासदी झेली, वो यह नहीं चाहते कि वही त्रासदी और लोग भी जेले।आव्हाड के बेटे की मौत बीमारी से हो चुकी है साथ ही उनकी एक बड़ी बेटी भी ह्रदय की बीमारी से पीड़ित है, अब इनके परिवार में दो बेटियां और पत्नी है।

2002 में मेरी बेटी के हार्ट का ऑपरेशन हुआ था। जब वह अस्पताल में थी तो उसी समय एक मरीज को ओ पॉजिटिव रक्त की जरुरत थी लेकिन रक्त नहीं मिलने से उसके घरवाले काफी परेशान थे और मरीज को भी काफी तकलीफ हो रही थी, उनकी तकलीफ देख कर मुझे आभास हुआ कि रक्तदान कितना जरुरी है, तो मैंने आगे बढ़कर रक्तदान किया और उसी समय से रक्तदान करना शुरू कर दिया।

पुंडलिक आव्हाड , पुलीस नाईक, आरटीओ, शिवड़ी



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