विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए आखिरी दो दिन बचे होने के बावजूद महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच खींचतान खत्म नहीं हुई है। दोनों गठबंधनों के सभी दलों में बड़े पैमाने पर बगावत हो चुकी है। महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर जहां दरार जारी है, वहीं महाविकास अघाड़ी में सामंजस्य भी खुलकर सामने आ गया है। (Nomination Deadline Approaches Amid Ongoing Mahayuti-MVA Conflict)
भले ही नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि मंगलवार तक है, लेकिन महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। महायुति में दरार को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस आपस में भिड़ गए।
अभी तक यह घोषणा नहीं हुई है कि भाजपा, शिवसेना (शिंदे), एनसीपी (अजित पवार) कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। महाविकास अघाड़ी में भी सीटों के बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिवसेना (ठाकरे) और कांग्रेस के बीच सुलह के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। नतीजतन, महाविकास अघाड़ी में कुछ सीटों पर दोस्ताना मुकाबले की संभावना पैदा हो गई है। कांग्रेस के दावे वाले निर्वाचन क्षेत्रों में शिवसेना द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा से कांग्रेस में नाराजगी की लहर दौड़ गई।
कांग्रेस नेताओं में दिनभर खींचतान चलती रही। सोमवार तक कोई समाधान नहीं निकलने पर कांग्रेस ने मंगलवार को कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में शिवसेना के खिलाफ नामांकन पत्र दाखिल करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिवसेना के अड़ियल रुख के कारण महा विकास अघाड़ी में दरार पैदा हो गई है।
कांग्रेस और शिवसेना के बीच विवाद बढ़ गया है, वहीं एनसीपी के नेता (शरद पवार) इस पूरे बवाल का लुत्फ उठा रहे हैं। कांग्रेस और शिवसेना नेताओं का रुख यह है कि शरद पवार को मध्यस्थता करनी चाहिए। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सोमवार 28 अक्टूबर को कोपरी-पचपाखड़ी निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। इस अवसर पर बड़े पैमाने पर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।
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