दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब मुंबई हाई कोर्ट ने भी पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लुर ने आदेश दिया कि रिहायशी इलाकों में पटाखों की बिक्री बंद हो और जिन पटाखों की दूकान रिहायशी इलाकों में हैं उनके लाइसेंस तुरंत रद्द हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब तक जितने भी पटाखों की लाइसेंस की मंजूरी दी गयी हैं उनमे कम से कम 50 फीसदी कमी की जानी चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में पुलिस को कार्रवाई करने का आदेश दिया।
पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में मालाड फायर वर्कस वेलफेयर एसोसिएशन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में शुरू हुआ पटाखों का फूटना
पर्यावरण को नुकसान होने के बाबत दाखिल की गयी एक याचिका के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दिया, जिसे लेकर अब महाराष्ट्र में भी पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में पर्यावरण मंत्री रामदास कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर आगे की रुपरेखा तय करने वाले थे, लेकिन शिवसेना सांसद संजय राउत ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया।
राउत ने कहा कि इस निर्णय से कई लोगों का रोजगार छिनेगा। उन्होंने आगे कहा कि गंगा का प्रदूषण पटाखों के कारण नहीं हुआ हैं. इस उद्योग से हजारों लोगों का उदर निर्वहन होता है।
तो वहीँ इस विवाद में अब मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे भी कूद गए हैं।
राज ठाकरे ने प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि मात्र हिंदुओ के त्यौहार पर ही बंदी क्यों? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या वाट्सएप्प पर पटाखे फोड़ेंगे क्या?
राज ने आगे कहा कि लोग जैसा चाहते हैं उन्हें वैसा ही त्योंहार मनाना चाहिए।
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