मराठी दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा और विधानपरिषद् दोनों सभागृह में एनसीपी ने मांग की कि राज्य के सभी माध्यमों के स्कूलों में कक्षा एक से लेकर दसवीं तक में मराठी भाषा को अनिवार्य किया जाये। बता दें कि राज्य में इस समय बजट सत्र चल रहा है।
'शुद्ध मराठी नहीं आती'
मराठी भाषा के विषय पर एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने कहा कि, मुझे किसी का अपमान नहीं करना है, लेकिन इस सभागृह में बैठे कई लोगों को शुद्ध मराठी लिखना और पढ़ना नहीं आता है। एक तरह से यह कह कर उन्होंने अपनी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने आगे कहा कि मराठी भाषा को बचाए रखने के लिए यह निर्णय लिया जाना अत्यंत आवश्यक है।
विधान परिषद में भी उठी मांग
विधान परिषद् में भी विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी माध्यमों के स्कूलों में कक्षा एक से लेकर दसवीं तक में मराठी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
बीजेपी नेता भाई गिरकर ने भी इस मुद्दे पर अपना प्रस्ताव रखा, साथ ही विरोधी पक्ष की तरफ से सुनील तटकरे और हेमंत टकले ने इस प्रस्ताव पर अपना समर्थन दिया।
शिक्षा बोर्ड लेगा अंतिम निर्णय
इस विषय पर शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि इस प्रस्ताव को शिक्षा बोर्ड के सामने पेश करेंगे। उससे संबंधित सभी मामले पर विचार कर सही निर्णय लिया जायेगा।